बुधवार, 5 नवंबर 2008

बहुत दिनों बाद

पिछले कई दिनों से सही कहूं तो चालीस दिन बाद फिर से ब्‍लॉग पर लौटा हूं। इस बीच गंगा, यमुना और हमारे यहां सरस्‍वती में बहुत सा पानी बह गया है। गंगा यमुना का पानी तो समुद्र तक पहुंच गया लेकिन सरस्‍वती का पानी पता नहीं कहां गया। कुछ दिन बाद बीकानेर में कोलायत का मेला भरेगा। इसमें दूर दूर से नाथ साधू भी आएंगे। लम्‍बे समय से कोलायत को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अभी तक तो सफलता नहीं मिली है। अच्‍छा ही है नंगी-अधनंगी हालत में बैठे नाथ साधुओं से विदेशी पर्यटकों की जितनी दूरी बनी रहे अच्‍छा है। कपिल मुनि की तपोभूमि पर गर्मी से सर्दी के संधिकाल में लगने वाले इस मेले के प्रति क्षेत्र के लोगों का खासा रुझान होता है। हमारे बीकानेर में तो कहा जाता है कि श्रीकोलायत के कपिल सरोवर का पानी छिड़ने के बाद ही ठण्‍ड की शुरूआत होती है। इससे पहले तक तो पंखे चलते रहते हैं घरों में।
ऑक्‍ल्‍ट का छात्र होने के नाते मेरा भी इस मेले के प्रति रुझान रहता है। एक दो बार तो मैंने वहां पूरा दिन इसी आशा में बिताया कि काश कहीं कोई पहुंचा हुआ नाथ साधू मिल जाए लेकिन अभी तक तो निराशा ही हाथ लगी है। इस बार कोशिश करूंगा कि रिपोर्टिंग के लिहाज से कोलायत के मेले में शिरकत करूं।
अब बात वापस ब्‍लॉगिंग की। पिछले कुछ दिनों में मैंने लिखना कम क्‍या किया सभी धड़ाधड़ लिखने लगे। अमित जी, आमिर भाई, वाजपेयी जी सभी लगे हैं धमाधम, पुण्‍य प्रसूनजी को भी देखा । लगा चलो कहीं तो हम भी आगे हैं। अब सभी लोग आ चुके हैं तो हम भी कुछ लिख मारते हैं शायद लोग पढ़ें। टाइफाइड ने तो पूरा सिस्‍टम ही बिगाड़ दिया। अच्‍छी स्‍पीड बनी हुई थी। अब तो घण्‍टे दो घण्‍टे बैठ पा रहा हूं। सारा समय दूसरों को पढ़ने में ही खर्च हो जाता है। लिखने लायक सोचता हूं तब तक सिस्‍टम को बंद करने का मन होने लगता है। आज बस इतना ही...