सोमवार, 11 मई 2009

छोटे शहर के वाशिंदे और रंगीन पल

यह बीकानेर का सार्दुल सिंह सर्किल है। बीकानेर रियासत के कुछ विश्‍वप्रसिद्ध राजा हुए हैं। उनमें से एक थे सार्दुल सिंह। यह फोटो संभवतया अजीज भाई का खींचा हुआ है। बीकानेर स्‍थापना दिवस, छब्‍बीस जनवरी और पंद्रह अगस्‍त को यह इसी तरह रौशन होता है।

 
मुशायरा 
मेरा एक ही दोस्‍त ऐसा है जो शेरो शायरी करता है। वली मोहम्‍मद गौरी। फ्रेंड्स एकता कमेटी बना रखी है। इसी नाम से फ्रेंड्स एकता पार्क भी है। इसी पार्क में वली भाई मुशायरा करते हैं। हिन्‍दी, अंग्रेजी और राजस्‍थानी के कवियों को भी बुला लेते हैं। फिर इसे नाम दिया जाता है विविध भाषा या बहुभाषा कविता संगोष्‍ठी। मैंने एक बार शिरकत की थी। यह शिरकत शब्‍द भी वहीं से सीखकर आया हूं। नीचे दिया गया फोटो हमारे फोटो अजीज भुट्टा जी का खींचा हुआ है। मेरे दोस्‍त का है सो मैंने लगा लिया है। माइक पर मुंह लगाए बैठे हैं वली मोहम्‍मद गौरी। साथ में अन्‍य विधाओं के कवि और गणमान्‍य लोग भी बैठे हैं। (अब वली भाई गा रहे हैं तो कोई तो झेलेगा ही। :) )



सेलिब्रिटी मेरे साथ ... 
और यह है राजा हसन। इसने बहुत जिद की तो मैंने इसके साथ फोटो खिंचवा लिया। वैसे ऑफिस में सब कह रहे थे कि मैं जिद कर रहा था। पता नहीं मुझे स्‍पष्‍ट याद नहीं है। लेकिन आप लोगों को राजा हसन याद होगा। सारेगामापा में राजा ने जो वंदे मातरम गाया था। उस परफार्मेंस में तो राजा ने रहमान को भी पीछे छोड़ दिया था। यह वही राजा हसन है। 


अगली बार फिर कुछ दृश्‍य एकत्र करने की कोशिश करूंगा। जैसा कि ज्ञानदत्त पाण्‍डेजी कहते हैं कैमरा तो पोस्‍ट एम्‍बेडेड गैजेट है।