रविवार, 5 जुलाई 2009

मैं संक्रामक हो गया हूं !!

अब मैं कह सकता हूं कि मैं संक्रामक ब्‍लॉगर हो गया हूं। पिछले चार-पांच महीने में कई लोगों को ब्‍लॉग शुरू करवा दिए हैं। इनमें से कुछ ब्‍लॉग तो अच्‍छे खासे चल भी रहे हैं। मुझसे बातचीत करने वाले लोग कहते हैं कि थोड़ी देर की बात के बाद ही मैं ब्‍लॉग-ब्‍लॉग बोलने लगता हूं। पहले पोस्‍ट लिखकर पब्लिश करता और लोगों को घर लाकर वह पोस्‍ट पढ़ाता था। अब जहां भी जाता हूं वहां जीमेल अकाउंट बनवाता हूं और ब्‍लॉग शुरू करा देता हूं। मेरे कई  दोस्‍त तो मेरी इस संक्रामक बीमारी के कारण मुझसे कटे-कटे भी रहने लगे हैं। :)

इस संक्रमण का सबसे पहला शिकार थे मेरे सीनियर अनुराग हर्ष जी। उन्‍होंने अपने नाम से ही अपना ब्‍लॉग शुरू किया। अब एक पोस्‍ट लिखते है। मुझे दिखाते हैं और ब्‍लॉगवाणी पर अपने पाठकों के आंकड़े देखते हैं। दूसरा नम्‍बर रहा पीटीआई के फोटोग्राफर दिनेश गुप्‍ता का। उन्‍होंने अपना फोटो ब्‍लॉग WORLD WITH MY EYES बनाया। पहले ही महीने में 55 पोस्‍ट ठेल दी। मैंने कहा बंधुवर कभी कभार हैडिंग भी लिख दिया करो। अब वे हैडिंग लिखकर पोस्‍ट में फोटो ठेलते हैं। इससे आगे अभी मैंने बताया नहीं है सो आगे कुछ करते भी नहीं हैं। तीसरा नम्‍बर कह सकते हैं जूलॉजी के लेक्‍चरर डॉ. प्रताप कटारिया का। उन्‍होंने अपने ब्‍लॉग desert wildlifer में लिखना तो शुरू कर दिया लेकिन पहली पोस्‍ट मेरे सामने लिखने के बाद आज तक वापस और कुछ लिखा नहीं है। इसके बाद मैंने ट्राइ किया स्‍तंभकार विनय कौड़ा पर। वे कहते तो हैं ब्‍लॉग शुरू करने के लिए लेकिन करते नहीं हैं। अगली मुलाकात में उन्‍हें ब्‍लॉगर बना ही दूंगा। इसके अलावा फूटी आंख नाम से भी एक ब्‍लॉग शुरू करवा चुका हूं। लेखक ज्ञान संतोषजी अपना नाम नहीं बताना चाहते सो उनका नाम नहीं दे रहा। हां अभी तक उन्‍होंने कोई पोस्‍ट नहीं लिखी है लेकिन शीघ्र ही वे एक कुत्‍्ते का इंटरव्‍यू छापेंगे।

पिछले दिनों जयपुर गया था। वहां मेरे एक दूर के मामाजी हैं डॉ शिव हर्ष। उन्‍होंने बीसेक सालों तक अमरीका में हार्ट सर्जन के तौर प्रेक्टिस की और अब वापस जयपुर आकर रहने लगे हैं। उनके कम्‍प्‍यूटर में कुछ खराबी आई थी। उसे दुरुस्‍त कराने के लिए मुझे बुलाया। कम्‍प्‍यूटर तो हाथों-हाथ ठीक नहीं हुआ लेकिन उनका ब्‍लॉग पहले ही बन गया। आप भी देखिएगा भारत में ह्रदय रोग के कारणों और निवारणों पर उनका ब्‍लॉग हार्ट सिम्‍पलीफाइड। यह ब्‍लॉग अंग्रेजी में ही सही लेकिन है केवल भारतीयों के लिए। डॉ शिव पांच दिन में दो पोस्‍ट ठेल चुके हैं और इसी रफ्तार से आगे बढ़ने वाले हैं। आप वहां पहुंचकर उनकी हौंसला आफजाई कर सकते हैं।