सोमवार, 24 अक्तूबर 2011

मेरा आदर किया तो... झापड़ दूंगा!!

अरे नहीं यह मैं नहीं कह रहा, पूजारी महाराज ने कहा। और इतना स्‍पष्‍ट कहा कि मैं दंग रह गया। पिछले कुछ समय से इन पुजारीजी के पास जा रहा हूं। पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन बहुत ज्ञानी हैं। उनके पास कई तरह के लोग आते हैं। कुछ लोगों में एक-दो दिन बात करने के बाद उनके प्रति श्रद्धा पैदा होने लगती है। फिर किसी को कोई समस्‍या होती है तो वह पुजारीजी से आकर बात करता है, पुजारी जी अपनी तरंग में कुछ बोल देते हैं और सुनने वाले को अपनी समस्‍या का समाधान नजर आने लगता है।

यहां तक सब ठीक है, लेकिन कुछ दिन बाद श्रद्धालु जैसे ही पुजारीजी से कहता है कि उसकी पुजारीजी के प्रति अगाध श्रद्धा है, पुजारीजी चिढ़ जाते हैं। बोलते हैं मेरा आदर सम्‍मान करने की कोई जरूरत नहीं है, ना ही मेरे प्रति कोई पूर्वाग्रह रखो।

मैंने एक को डांट पड़ते देखा। बाद में जब अकेले बैठे थे, तो पास जाकर बातचीत करने लगा, उसी दौरान पूछा कि आप आदर-सम्‍मान करने वालों से इतना चिढ़ते क्‍यों हैं। तो बोले आज तुम श्रद्धा का पात्र बना रहे हो, कल मुझे किसी डांस क्‍लब में खड़ा देखोगे तो चिल्‍लाओगे कि इतने बड़े पुजारीजी हैं, मैं इनकी इज्‍जत करता हूं और ये डांस क्‍लब में खड़े शराब पी रहे हैं। पहले काम होता है तो मेरे पास आते हैं, बाद में अपनी गरज से मेरे प्रति श्रद्धा पैदा करते हैं। इसमें मेरा कहीं दोष नहीं है। इसके बावजूद उनकी गरज और उनके स्‍वार्थ की श्रद्धा के प्रति मुझे जिम्‍मेदार बने रहना पड़े यह मुझे बर्दाश्‍त नहीं है। इसी कारण मैं किसी की श्रद्धा का पात्र बनने से कतराता हूं।

2002110300030401इन दिनों किरण बेदी के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। पहले से स्‍थापित सिस्‍टम के साथ लड़ते हुए इसमें सुधार की कोशिश कर रही देश की श्रेष्‍ठ महिला को आज कुत्सित राजनीति की भेंट चढ़ाया जा रहा है। जब उन्‍होंने नौकरी में रहते हुए पहली बार सिस्‍टम के खिलाफ काम करने की कोशिश की होगी, तब किसी ने भी उनके भीतर कोई छद्म चेहरा नहीं देखा होगा। समय के साथ इस आईपीएस ऑफिसर ने सिस्‍टम बदलने तक इसकी कमियों का ही फायदा उठाकर बेहतर काम करने के प्रयास किए होंगे। ऐसे में कई चीजों को गलत भी ठहराया जा सकता है। लेकिन कुछ सवाल बाकी रह जाते हैं..

- जब किरण बेदी सिस्‍टम के भीतर रहकर उससे लड़ रही थी तब,  आज आरोप लगा रहे कितने लोग उनके साथ थे ?

- जब किरण बेदी ने सिस्‍टम की कमियों का फायदा उठाना शुरू किया तब किन लोगों ने उसकी तरफ अंगुली उठाई, अगर नहीं उठाई को आज इसकी क्‍या जरूरत आन पड़ी ?

- आज वे किस फायदे के लिए यह सबकुछ कर रही हैं ?

- क्‍या बेदी ने किसी एक भी व्‍यक्ति को अपने प्रति श्रद्धावनत होने के लिए दबाव बनाया?

- किरण बेदी इकोनॉमी क्‍लास में सफर करती हैं और बिजनेस क्‍लास का पैसा लेती हैं, तो क्‍या जरूरत है उन्‍हें बुलाने की। अगर जरूरत है तो उनकी शर्तों पर ही उन्‍हें बुलाना होगा।

- राजनीतिज्ञों के खिलाफ बोलने पर हमेशा से ही उन पर हमले होते रहे हैं, यह उनकी नीयति लगती है, लेकिन क्‍या इससे उनकी नीयत पर शक किया जा सकता है।

 

राजनीति गंदी होती है। हमारे यहां भी अपवाद नहीं है। यह गंदी थी, गंदी है और भविष्‍य में भी गंदी ही रहेगी। इस सिस्‍टम को साफ करने वाले लोगों को अपने हाथ गंदे करके ही इसे साफ करना होगा। मैं किरण बेदी की इज्‍जत करता हूं, लेकिन उनके प्रति श्रद्धा नहीं रखता, केवल इसलिए ताकि उन पर सौ प्रतिशत सही बने रहने का दबाव न बनें और वे सफाई के इस काम में सतत प्रयास जारी रखें...