साइंस ब्लॉगर्स एसोसिएशन की वेबसाइट पर यह महत्वपूर्ण वीडियो दिखाई दिया। मुझे लगा कि लोगों को इस बारे में पता लगना चाहिए। सो मैंने इसे अपने ब्लॉग पर भी लगाने का विचार बनाया। आप देखिए कि क्या हकीकत है एड्स की... कुछ बातें सोचने के लिए मजबूर करती हैं। हो सकता है एड्स से लोग मर रहे हों, लेकिन क्या यह वही एड्स है जिसे लेकर पूरी दुनिया में तहलका मचा हुआ है।
मंगलवार, 26 अक्टूबर 2010
एक महत्वपूर्ण वीडियो एड्स से सम्बन्धित...
https://theastrologyonline.com/famous-astrologer-sidharth-joshi/
Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.
रविवार, 1 अगस्त 2010
सतत क्रांति के दौर में...
पुरातनपंथियों ने भी मुझे बरगलाने में कोई कसर नहीं रखी। मुझे बताया गया कि ज्यादा साइकिल चलाने से घुटने खराब हो जाते हैं, पाइल्स की समस्या हो जाती है। एक ने तो आंकड़ों के साथ सिद्ध किया कि इससे हृदय गति तक रुक जाती है।
खैर कुछ सालों बाद एक पुराने स्कूटर ने मुझे बदलाव का रास्ता दिखाया। नई नौकरी के साथ मिला पुराना स्कूटर मेरी बहुत कड़ी परीक्षा लेता और मैं फिर से साइकिल के बारे में सोचने लगता। शादी के साथ पल्सर मिली। तब से लेकर छह दिन पहले तक किक मारने के लिए भी टांग नहीं हिलाई। लम्बे समय तक आराम की अवस्था ने एक बार फिर क्रांति की स्थितियां पैदा कर दी।
कई दिन तक सोचने, कसमें खाने, वादे करने और मन को कड़ा करने की कार्रवाई के बाद एक ऐतिहासिक दिन (डेट तो रसीद में लिखी हुई होगी, उठकर देखूंगा तो फ्लो टूट जाएगा) मैं फिर से साइकिल खरीद लाया। इस बार थोड़ी स्टाइलिश है। थोड़ी इसलिए कि भाई साथ में था। वह पुरातनपंथियों की साजिश में हमेशा साथ रहता है। उसने गियर और शॉकर वाली साइकिल के विरोध में अपना वीटो पावर पेश कर दिया। सो दोनों तरह की खासियत इस साइकिल में शामिल नहीं कर पाया। जो भी हो इसके हैण्डल सीधे-सीधे नहीं है, यानि सीधे हैं पुरानी साइकिलों की तरह टेढ़े नहीं हैं।
पांच दिन से साइकिल चलाकर बीकानेर में सतत क्रांति के दौर को फिर से जगाने का प्रयास कर रहा हूं। अब तक कुल जमा 23 लोगों ने साइकिल का ट्रायल लिया है। दस मीटर से लेकर सत्तर मीटर तक के ट्रायल हुए हैं। मेरे कपड़ों, मोबाइल, घड़ी और दूसरे सहायक उपकरणों की तुलना में पांच ही दिनों में साइकिल ने दस गुना कमेंट बटोर लिए हैं।
इसी के साथ एक रहस्योद्घाटन भी हुआ है कि गरीब, दलित, पिछडि़त, दया का पात्र व्यक्ति साइकिल चलाए तो उस पर कोई ध्यान नहीं देता, लेकिन एक मोटा, चमकते चेहरे वाला, जींस टीशर्ट पहना आदमी तबियत से धीरे-धीरे साइकिल चलाता जाए और उसके चेहरे पर खुशी के भाव हो तो पास से मोटर वाले दुपहिया या चार पहिया वाहन पर निकल रहा व्यक्ति भी पहले तो गौर से देखता है फिर ईर्ष्या से भर उठता है। ऐसे लोगों के भाव तो अधिक मुखरता से सामने आते हैं जिनके वाहन का पैट्रोल खत्म हो चुका होता है और वे सामने से अपनी गाड़ी घसीटते हुए आ रहे होते हैं।
जो भी हो एक और क्रांति का सूत्रपात हो चुका है, जल्द ही बीकानेर में साइकिल चलाने वालों की संख्या बढ़ी हुई दिखाई देने लगेगी। मैंने यह नहीं कहा कि संख्या बढ़ जाएगी...
यह सावन के अंधे वाली बात भी हो सकती है... :)
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Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.
मंगलवार, 27 जुलाई 2010
सुपरमैन का कंफ्यूजन और सुपर ब्लॉगर
अब आप कहेंगे ये लोग तो बिल्कुल स्पष्ट तरीके से अपना काम करते हैं। अच्छे लोगों की रक्षा करते हैं और बुरे लोगों को दण्डित करते हैं। लेकिन मुझे यह बात इतनी सीधी नहीं लगती है। इसमें कुछ लोचा है। ये सभी लोग पहले की बनाई गई व्यवस्था को ही फॉलो कर रहे हैं। न तो उसमें बदलाव ला रहे हैं न व्यवस्थापकों को बदलाव लाने के लिए मजबूर कर रहे हैं। और तो और पिछले दिनों आए एक्समैन ने भी अच्छी ताकतों के साथ मिलकर अच्छे काम में सहयोग देना शुरू कर दिया।
ऐसा क्यों
उन्हें क्यों पहले से बनी व्यवस्था को ही फॉलो करना चाहिए जबकि
- उनके पास नैसर्गिक ताकत है
- पूर्व के किसी भी आम इंसान की तुलना में अधिक बुद्धि है
- पहले से अर्जित किसी भी ज्ञान से अधिक ज्ञान है
- किसी भी सत्ता के प्रति जवाबदेही नहीं है
- पृथ्वी के भीतर या ब्रह्माण्ड में कहीं उन्हें रुकना नहीं है
- ताकत और बुद्धि के अलावा कम जरूरतें उन्हें स्वतंत्र प्रभुसत्ता देती हैं
- वे खुद बेहतरीन न्याय कर सकते हैं
- उन्हें सलाखों में कैद नहीं किया जा सकता
- राजनीति से वे परे हैं
- सामाजिक बंधन उन्हें बांध नहीं सकते
- वे पलक झपकते ही कहीं भी पहुंच सकते हैं
और भी ऐसी हजारों विशेषताएं जो किसी आम मानव की तुलना में उन्हें श्रेष्ठ बनाती है। इसके बावजूद वे उसी व्यवस्था का हिस्सा बनते हैं जो व्यवस्था पहले से बनी हुई है। वे उसमें बदलाव नहीं लाते, बल्कि व्यवस्था को तोड़ने वाले लोगों को दण्डित करते हैं। पिछले दिनों हैनकॉक आया और उसके बारे में पढ़ा तो लगा कि हां यह है असली सुपरमैन, लेकिन फिल्म के अंत तक वह भी आम सुपरमैन बन गया। अच्छे कपड़े पहन लिए और समाज की सेवा करने लगा। तो क्या सुपरमैन केवल समाज की सेवा के लिए अतिरिक्त शक्तियां लेकर आते हैं।
वास्तव में सुपरमैन कर क्या रहे हैं-
- कानून तोड़ने वालों को दण्ड देते हैं
- व्यवस्था को बनाए रखने में सहयोग देते हैं
- निर्बल लोगों को समस्याओं से बाहर निकालते हैं
- अंडर कवर बने रहकर सामान्य जिंदगी जीते हैं
- कानून का पालन करते हैं
- राजनीतिज्ञों, पुलिस, प्रशासन, समाज के ठेकेदारों, बॉस, परिवार जैसी इकाइयों का सम्मान करते हैं
- सुंदर बने रहते हैं और सुंदर और सभ्य लोगों का सम्मान करते हैं
- लोगों की केवल उतनी मदद करते हैं कि वे फिर से खड़े होकर पूर्व स्थापित व्यवस्था के लिए काम कर सकें
- बुरे लोगों को पकड़ते हैं और उन्हें पुलिस के हवाले कर देते हैं
- पुल को गिरने से बचाते हैं, रेल को ट्रेक पर बनाए रखते हैं, ट्रॉली को नदी में गिरने से रोकते हैं
ये सभी काम तो पहले से स्थापित व्यवस्था के लोग कर ही रहे हैं। सुपरमैनों के इन कामों को देखकर तो लगता है कि लोगों का व्यवस्था से जुड़े कार्मिकों पर से विश्वास उठ गया है। अब आम जनता को ऐसे लोग चाहिए तो तन-मन और धन से उनकी सेवा तो करें, लेकिन अंडर कवर रहकर कुछ भी बदले में नहीं मांगे। ऐसा क्यों, भगवान का अवतार अधर्म को खत्म कर धर्म को फिर से स्थापित करने के लिए ही होता है। इंसान की बनाई व्यवस्था ढहने लगती है तो वह उसे सुधारने के बजाय भगवान को याद करता है। उन्हें कहता है आओ और मुझे फिर से अपने कंफर्ट जोन में लौटा दो। जब से भगवान ने आना बंद किया है इंसान ने सुपरमैन को बुलाना शुरू कर दिया है।
तो सुपरमैन ऐसा क्यों नहीं करते कि-
- वे अपनी शक्तियों के इस्तेमाल का राज्य और सरकार से कर वसूलना शुरू कर दें
- अंडर कवर रहने के बजाय एक नई व्यवस्था बनाएं जो राज्य के सामानान्तर चले
- वे खुद अपने स्तर पर न्याय करें। जो लोग सही है उन्हें प्रशय दें और जो गलत हैं उन्हें अपने स्तर पर ही दण्डित कर दें
- वे ऐसे विचार लेकर आएं जो हर जगह क्रांति कर दे
- वे ऐसे लोग तैयार करें जो उनकी तरह ही अपनी सामान्तर सत्ता चलाएं
- वे लोगों को सुपरमैन बनने के लिए प्रशिक्षित करें
वे खूब बच्चे पैदा करें और पूरी पृथ्वी को सुपरमैन की नई प्रजाति से भर दें, ताकि अक्षम और नाकारा हो चुके इंसान पूरी तरह खत्म हो जाएं जैसा कि होमो सैपियंस ने नियंडरथल मानव के साथ किया होगा। यह नई सुपरमैन प्रजाति ही पृथ्वी पर राज करे और किसी दूसरे को विकसित ही नहीं होने दे। बिल्कुल वैसे जैसे बरगद अपने नीचे किसी दूसरे पौधे को विकसित नहीं होने देता।
पर ऐसा नहीं होगा- क्योंकि आखिर सुपरमैन भी तो इंसान ने ही बनाए हैं। और जब इंसान ने अपने लिए सुपरमैन बनाए हैं तो वे इंसान की ही सेवा करेंगे, न कि उन्हें मारकर अपनी दुनिया बनाएंगे।
तो कैसा होगा सुपर ब्लॉगर
- पहले से स्थापित ब्लॉगरों को फॉलो करने वाला
- पहेलिया लिखने के दौर में पहेलिया लिखने वाला
- भड़ास निकालने वाला
- पुरानी डायरी से निकालकर कविता लिखने वाला
- दूसरे के ब्लॉग पर केवल अच्छे अच्छे कमेंट लिखकर उन्हें प्रोत्साहित करने वाला
- आस-पास के लोगों को प्रेरित कर उनके भी ब्लॉग शुरू कराने वाला
या मन की बातें बिंदास होकर लिखने वाला.....:)
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Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
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रविवार, 13 जून 2010
प्रेम का शिकारा
अब शिकारे में तो एक ही व्यक्ति बैठ सकता है तो दूसरे का क्या होता है... यही तो सबसे महत्वपूर्ण बिंदू है। वास्तव में शिकारे में एक ही आदमी होता है। दूसरा तो पानी में उतराता रहता है। कभी पति शिकारे में तो पत्नी पानी में और कभी पत्नी शिकारे में तो पति पानी में दिखाई देते हैं। कब, कौन, किसे और कैसे पानी में धकेलने में कामयाब होता है यह व्यक्तिगत स्किल पर निर्भर करता है। आमतौर पर पुरुषों को ही अधिकतर पानी में देखा गया है, लेकिन कई बार पत्नियां भी पानी में आ गिरती हैं। पर, मूढ़ पुरुषों की तुलना में वे पानी में कम वक्त बिताती हैं। यही नहीं जब पत्नी शिकारे में होती है तो झील में भ्रमण को दौरान शिकारे को धक्का भी पतिदेव से ही लगवाती हैं। आप अगर शादीशुदा हैं तो इस स्थिति से रोजाना ही रूबरू होते होंगे।
दरअसल शिकारे की सवारी के कई नियम हैं। पता नहीं ये शाश्वत हैं कि नहीं, लेकिन शादी के बाद से अब तक पिछले पांच सालों में मुझे इनकी इटरनिटी पर कोई संदेह नहीं रहा है। आप भी विश्वास कर सकते हैं।
पहला नियम: शिकारे में एक बार में केवल एक ही खिलाड़ी बैठ सकता है, इसमें बैठने का आपके पास ठोस कारण होना चाहिए, वरना आप खुद ब खुद पानी में आ गिरेंगे।
दूसरा नियम: पानी से निकलने के लिए सही समय का इंतजार करें, समय से पहले बाहर निकल आए तो शिकारा भरा हुआ मिलेगा और फिर से पानी में जा गिरेंगे।
तीसरा नियम: एक बार शिकारे पर जमने के बाद पानी में गिरे साथी को शिकारे में पहुंचने के लिए हाथ देने का उपक्रम करें, भले ही आपके हाथ में तेल ही क्यों न लगा हो।
चौथा नियम: जितनी बार आप फिसलकर पानी में गिरेंगे आपके शिकारे में लौटने का प्रयास करने की समयावधि भी बढ़ती जाएगी।
पांचवा नियम: एक बार पानी में गिर ही पड़ें तो कुछ देर वहीं बने रहें, बिना वजह खुद को शिकारे में होने का धोखा न दें... आखिर हार मानने का जज्बा भी तो होना चाहिए।
नोट: ध्यान रखें कि जब आप दोनों ये खेल खेल रहे हों तो किसी और को आपके शिकारे या पानी में होने की स्थिति का पता नहीं चले। इससे केवल जगहंसाई ही हो सकती है। सॉल्यूशन नहीं मिलेगा। सो निजी प्रयासों से खेल को चालू रखें और बाहर के लोगों को बाहर रखें। आखिर खेल आपका है और खेल का मजा भी आपका निजी है... :)
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सोमवार, 24 मई 2010
उफ़ ये गर्मी
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रविवार, 16 मई 2010
सूनी-सूनी अक्षय तृतीया
आज मैं अपने अनुज आनन्द के साथ शहर की तंग गलियों के बीच घूम रहा था तो कुछ पुराने घर दिखाई दिए। अपने नानी के खाली पड़े घर के करीब से गुजरते हुए भी उसे नजरअंदाज करने की कोशिश की। पास ही एक घर में हम कुछ दिन किराए पर रहे थे, उसकी छत पर आज दूसरे लोग दिखाई दिए। परकोटे में शहर खाली पड़ा था। गलियों और मोहल्लों में छाया सूनापन जैसे दिल में उतर गया।
आज अक्षय तृतीया थी, सुबह चार बजे लोग छतों पर चढ़ गए और दिन ढलने पर नीचे उतरे। करीब पच्चीस साल तक मेरा भी यही क्रम रहा, लेकिन इस साल कब अक्षय तृतीया आ गई और गुजर गई पता ही नहीं चला। पंद्रह सौ पैतालीस विक्रम संवत में राव बीका ने बीकानेर शनिवार के दिन अक्षय तृतीया पर बीकानेर रियासत की नींव रखी थी। इसी दिन को लोग स्थापना दिवस के रूप में 523 साल बाद भी उसी जोश और उमंग के साथ मना रहे हैं।
जिन घरों के करीब से गुजरा था वहां की छतों की खूब यादें जेहन में उमड़ रही हैं। अक्षय तृतीया से पंद्रह दिन पहले से ही मेरे जैसे नौसिखिए पतंगबाजी करनी शुरू कर देते थे।
...बोई काट्या हे,
उडा रे उडा,
थारी नाकड़ ऊपर
घूम रयो, घूमाय रयो
उडा रे उडा....
सालों-साल छत पर चढ़े हुए कई अनुभवों से गुजरा। पहले सिर्फ पतंगबाजी करने के लिए छत पर चढ़ता था। बाद में आस-पड़ोस की सुंदर कन्याएं भी देखने लगा। उसके बाद ज्योतिष के अध्ययन के दौरान हवा का रुख देखता रहता था। तीन-चार साल तक उसी आधार पर खरी-खोटी भविष्यवाणियां भी की। कुछ सही रही तो कुछ सिरे से ही गलत हो गई। दोस्तों से लड़ाई और दुश्मनों से दोस्ती तक के काम छतों पर निपट जाते। कभी सी-28 या बरेली का सॉलिड मांझा हाथ लग जाता तो, अश्वमेघ यज्ञ शुरू हो जाता। हवा की दिशा की सारी पतंगे काटने तक चुपचाप पेच लड़ाते जाते और अंत में पूरी ताकत से चिल्लाते.. बोई काट्या हे...
इस साल ऐसा कुछ नहीं हुआ। बीती रात ऑफिस में काम की अधिकता के चलते देर से घर पर आया, फिर देर तक सोता रहा, फिर गर्मी बढ़ गई। मौसम विभाग में लगे थर्मामीटर में पारा 45:5 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया। छतों पर इससे तीन डिग्री तक अधिक तापमान होता है। यानि 49 के करीब। ऐसी गर्मी पहले भी रहती थी, लेकिन महसूस नहीं होती थी, लेकिन आज तो छत पर चढ़ने की हिम्मत ही नहीं कर पाया। शाम को अकेला छत पर चढ़ा। दोस्त तो सारे बीकानेर छोड़ चुके हैं। भाई को शौक नहीं रहा। सो दो-तीन पतंगें उड़ाकर नीचे चला आया। अब पोस्ट लिख रहा हूं। मैं सोचता था, पतंग उड़ाने वाले खुद भी ऊंची उड़ाने भरते हैं, लेकिन आज लगा जैसे जमाना ठहर गया हो...
काश अगली आखातीत कुछ मस्त गुजरे...
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Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
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रविवार, 2 मई 2010
और मैं बन गया इल्ली
मैं सच्ची मुच्ची इल्ली बन गया था। जब तक मुझे अपनी गलती का तब तक तो मैं पेस्टिसाइड से त्रस्त इल्ली की तरह तड़प रहा था। बहुत साल पहले शरद जोशी का व्यंग्य पढ़ा था, जीप में सवार इल्लियां, तब चने के खेत में घूम रहे सरकारी अधिकारियों पर कटाक्ष करते हुए शरद जोशी ने उन्हें फसल को तबाह करने वाली इल्लियों की संज्ञा दी थी। तब पढ़ते हुए मुझे सरकारी अधिकारियों से घृणा होने लगी थी, लेकिन बाद में मैंने भी वही गलती की...
हुआ यूं कि, कुछ साल पहले हमारे एक वरिष्ठ साथी के अवकाश पर जाने के कारण मुझे यहां राष्ट्रीय शुष्क बागवानी संस्थान की रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी दी गई। मैंने सोचा शोध संस्थान है तो निश्चय ही शोध संबंधी अच्छी खबरें मिलेंगी। सो पहले दिन ही पूरे जोश से पहुंच गया और प्रधान वैज्ञानिक के कमरे में बैठकर काफी देर तक उनसे कभी यह कभी वह पूछता रहा। पता नहीं अधिकारी ने क्या समझा, उन्होंने बातों के बीच मुझे बताया कि हमने बेर की सैकड़ों किस्में विकसित की हैं। और इन दिनों उनमें से काफी में फल आए हुए हैं। चलिए मैं आपको दिखा देता हूं।
वैज्ञानिक महोदय मुझे लेकर पहुंच गए संस्थान के रिसर्च फील्ड में, जहां बेर की छोटी-बड़ी झाडि़यों पर लाल, पीले बेर लगे हुए थे। कुछ बिल्कुल बेर थे, तो कुछ नींबू जितने और कुछ छोटे सेव के आकार के भी थे। मैं उनके बारे में कुछ जानकारी लेता, उन्होंने झाड़ी के सबसे अच्छे बेर उतारकर मुझे दिए। मैंने मना कर दिया...
लेकिन उनका आग्रह चलता रहा, कुछ देर बाद ही बेर के स्वाद और क्वालिटी के बखान के साथ आग्रह प्रबल हो गया, मैंने बेर खाने शुरू कर दिए। करीब पंद्रह प्रजातियों के तीस से अधिक बेर खाने के बाद रिपोर्ट लेकर ऑफिस आ गया।
अभी स्टोरी बना ही रहा था कि पेट में दर्द शुरू हो गया। कुछ देर तक मैंने इग्नोर किया, लेकिन दर्द था कि बढ़ता ही जा रहा था। कुछ देर में तो ऐसी ऐंठन हुई कि सीधा भी बैठ नहीं पा रहा था। आखिर उठा और पास के मेडिकल स्टोर पर जाकर पेटदर्द की दवा ली। इसके बाद भी घंटेभर तक ऐंठन वाला दर्द बना रहा। रात आठ बजे तक मेरी स्थिति में कुछ सुधार हुआ।
अब सोचने का मौका मिल रहा था। कुछ देर सोचने के बाद मेरी हंसी छूट गई। हमारे वरिष्ठ साथी ने पूछा क्या हुआ तो मैंने कहा आज मैं इल्ली बन गया था। शरद जोशी की इल्लियां जीप में सवार होकर चने को खराब करने पहुंची थी, भले ही मैंने ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाया लेकिन काम तो वैसा ही किया था।
आज ये किस्सा ध्यान में दोबारा इसलिए आया कि पिछले दिनों मुझे राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र की बीट सौंपी गई, पहली विजिट में ही वहां के पीआरओ ने मुझे कैमल मिल्क से बनी आइसक्रीम खिलाने का ऑफर दिया... इल्ली वाला किस्सा ध्यान में आते ही मैंने आइसक्रीम के लिए सख्ती से मना कर दिया...
वह पीआरओ अब भी सोच रहा है कि मैं केन्द्र से नाराज हूं जबकि मैं इल्ली बनने से बचने की कोशिश कर रहा हूं...
पता नहीं भलमानस में या आग्रह नहीं टाल पाने के कारण कितने लोग इल्ली बन जाते होंगे... क्या आप भी बने हैं कभी इल्ली...
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गुरुवार, 25 मार्च 2010
सर्वाधिक मूर्खताएं - माइक्रोपोस्ट
बच्चे के साथ
शीशे के सामने
और प्रेमिका के साथ उसके सामने...
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रविवार, 14 मार्च 2010
नींद - एक और कविता पुरानी डायरी से
ऐसी ही एक कविता... पता नहीं कैसी है...
प्यारी नींद
आज फिर तैयार हो निकला मैं
इस संग्राम में
नई भोर में नया जीवन लिए
भिड़ने को तैयार मैं
दिनभर जूझा, दिनभर लड़ा
थक गया उस शाम मैं
फिर सुहानी रुपहली उस शाम को
मस्ती में डूबा रहा मैं
फिर अकेले बैठ बिताए
कुछ तन्हाई के पल मैंने
खो गया चैन,
ले ली बेचैनी मैंने
उड़ गई नींद
जागता रहा सारी रात मैं
समझ न पाया समझ में
क्या खो दिया कुछ पाने में
घावों को भरने वाली
नींद को छोड़ दिया मैंने
जो मीठी नींद दे सकती थी
फिर लड़ने की ताकत मुझे
तोड़ा उस नींद से नाता
जागता रहा सारी रात मैं...
सिद्धार्थ - 13-4-2002
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एक अभिव्यक्ति
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मंगलवार, 9 मार्च 2010
फिर जुड़ गया होम्योपैथी से
सालों पहले, यानि वर्ष 1997 और उससे पहले मेरे दिन के कुछ घंटे चाहे-अनचाहे होम्योपैथी के साथ गुजरते थे। रोग हो या न हो, सत्यव्रत सिद्धांतावलंकार, बोरिक और नैश पढ़ने को मिल जाते थे। कई बार क्लार्क की रैपरेटरी के पन्ने भी उलटने पड़ते। यह सब होता मेरे पड़नानाजी स्वर्गीय माधोदासजी व्यास के सानिध्य के कारण। मेरे नानीजी के पिताजी। कभी उन पर पूरी पोस्ट लिखूंगा। यहां बस यह उल्लेख कर देना चाहता हूं कि 78 साल की उम्र में उन्हें एक बार लगा कि होम्योपैथी दवाएं भी कारगर हो सकती हैं, और उन्होंने होम्योपैथी पढ़नी शुरू कर दी और बाद में एक रोगी को तो मृत्युशैय्या से लौटा लाए थे। वर्ष 1999 में उनके निधन के साथ होम्योपैथी का सफर भी थम गया। उनके बारे में बाकी बातें बाद में,
हां, मैं फिर से लौट आया हूं होम्योपैथी के साथ।
कुछ दिन पहले पैट्रोल पम्प से महज बीस कदम की दूरी पर पैट्रोल खत्म हो गया। मैंने सोचा जय गणेश, और उत्साह में अपनी पल्सर से उतरा और उसे घसीटने लगा। अभी पांच सात कदम ही गया होउंगा कि ब्लैक आउट हो गया। आंखों के आगे अंधेरा। मैं जहां का तहां खड़ा रह गया। इसके कुछ दिन बाद शिक्षा निदेशालय की सीढि़या तेजी से चढ़ गया, ऊपर के माले पर पहुंचकर फिर वही स्थिति हुई। मैंने किसी को कहा तो नहीं लेकिन ऑफिस में कचौरी समोसे खाने बंद कर दिए, जो रोजाना शाम को किसी न किसी बहाने आ जाते हैं।
निदेशालय में ही मिले शिवकुमार आचार्यजी उर्फ भाईजी, एक दिन वहां की कैंटीन में ही कचौरी की शर्त लग गई। मैंने कहा खाउंगा तो नहीं लेकिन हार गया तो खिला दूंगा। इस पर भाईजी ने पूछा क्यों, पहले तो मैं टाल मटोल करता रहा लेकिन बाद में मैंने उन्हें बता दिया। उन्होंने मुझे कहा एक बार मेरे घर आना। तब तक मुझे पता नहीं था कि वे होम्योपैथी का अध्ययन करते हैं। उन्हें सेंट्रल नर्वस का कोई डिसऑर्डर हुआ था बीसेक साल पहले, तब ऐलोपैथी के सभी ईलाज आजमाने के बाद उन्होंने होम्योपैथी पढ़नी शुरू कर दी थी। नर्वस डिसऑर्डर तो अभी भी वहीं है लेकिन दूसरे कई रोगों को ठीक करने में उन्होंने महारत हासिल कर ली है।
भाईजी के यहां गया तो वहां भाभीजी ने चाय के साथ भुजिया और खाखरे परोसे। मैंने चाय पी ली लेकिन दूसरी किसी चीज को हाथ नहीं लगाया। इस पर भाभीजी तो नाराज हो गए लेकिन भाईजी मुझे अपने कमरे में ले गए। वहां उनकी अलमारी में होम्योपैथी की दवाओं का भण्डार बना हुआ था। उन्होंने मुझे गैस मिक्सचर नाम की एक दवा की खुराक दी। गैस के कारण सिरदर्द हो रहा था। वह तुरंत ठीक हो गया। तुरंत से मतलब पांच-सात मिनट में। इसके बाद उन्होंने मुझे नक्स वोमिका 200 लाकर दी। कहा रात को सोते समय कुछ दिन ले ले। तनाव के कारण तेरा शरीर खराब हो रहा है। गैस मिक्सचर और नक्स ने तीन दिन में मुझे सिरे से बदल दिया। गर्दन और पेट के किनारे बढ़ रही चर्बी एक साथ खत्म हो गई और शरीर में पुरानी फुर्ती लौट आई।
अब फिर से सफेद हो रहे बालों के लिए एसबीएल का जोबरांडी का तेल और शैम्पू ले आया हूं। एक-दो दिन में फाइव फॉस भी फिर से ले आउंगा। पुरानी सब बातें वापस याद आने लगी हैं। हो सका तो अगले कुछ दिन में होम्योपैथी के कुछ और पक्षों के बारे में लिखने को मिल जाएगा।
मेरे पड़नानाजी माधोदासजी व्यास को नमन् और भाईजी को दिल से धन्यवाद...
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Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
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रविवार, 28 फ़रवरी 2010
अच्छी रही इस बार की होली...
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सोमवार, 11 जनवरी 2010
New ATM machine
A new sign in the Bank Lobby reads--- Please note that this Bank is installing new Drive-through ATM machines enabling customers to withdraw cash without leaving their vehicles. Customers using this new facility are requested to use the procedures outlined below when accessing their accounts.
After months of careful research, MALE &FEMALE Procedures have been developed. Please follow the Appropriate steps for your gender.'
1. Drive up to the cash machine.
2. Put down your car window.
3. Insert card into machine and enter PIN.
4. Enter amount of cash required and withdraw.
5. Retrieve card, cash and receipt.
6. Put window up.
7. Drive off.
FEMALE PROCEDURE:
1. Drive up to cash machine.
2. Reverse and back up the required amount to align car window with the machine.
3. Set parking brake, put the window down.
4. Find handbag, remove all contents on to passenger seat to locate card.
5. Tell person on cell phone you will call them back and hang up..
6. Attempt to insert card into machine...
7. Open car door to allow easier access to machine due to its excessive distance from the car.
8.. Insert card.
9. Re-insert card the right way.
10. Dig through handbag to find diary with your PIN written on the inside back page.
11. Enter PIN.
12. Press cancel and re-enter correct PIN.
13. Enter amount of cash required.
14. Check makeup in rear view mirror.
15. Retrieve cash and receipt..
16. Empty handbag again to locate wallet and place cash inside.
17. Write debit amount in check register and place receipt in back of checkbook.
18. Re-check makeup.
19. Drive forward 2 feet.
20. Reverse back to cash machine.
21. Retrieve card.
22. Re-empty hand bag, locate card holder, and place card into the slot provided!
23. Give dirty look to irate male driver waiting behind you.
24. Restart stalled engine and pull off.
25. Redial person on cell phone..
26. Drive for 2 to 3 miles.
27. Release Parking Brake
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Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.
