मंगलवार, 27 जुलाई 2010

सुपरमैन का कंफ्यूजन और सुपर ब्‍लॉगर

मुझे लगता है सुपरमैन शुरू से ही कंफ्यूज है। पहले तो लगता था कि कंफ्यूज है लेकिन अब लगता है कि उस पर जानबूझकर इस प्रकार का द्वंद्व थोपा गया है। सुपरमैन खाली उड़ने वाला सुपरमैन नहीं है। मेरे सुपरमैनों में स्‍पाइडरमैन, बैटमैन, हीमैन, सुपर कमाण्‍डो ध्रुव, नागराज, फैण्‍टम, मैण्‍ड्रेक, लोथार, साबू और भी जो नाम आपको याद आते हों और जिनके पास अपनी खुद की शक्तियां हों, इसमें जोड़ सकते हैं।
अब आप कहेंगे ये लोग तो बिल्‍कुल स्‍पष्‍ट तरीके से अपना काम करते हैं। अच्‍छे लोगों की रक्षा करते हैं और बुरे लोगों को दण्डित करते हैं। लेकिन मुझे यह बात इतनी सीधी नहीं लगती है। इसमें कुछ लोचा है। ये सभी लोग पहले की बनाई गई व्‍यवस्‍था को ही फॉलो कर रहे हैं। न तो उसमें बदलाव ला रहे हैं न व्‍यवस्‍थापकों को बदलाव लाने के लिए मजबूर कर रहे हैं। और तो और पिछले दिनों आए एक्‍समैन ने भी अच्‍छी ताकतों के साथ मिलकर अच्‍छे काम में सहयोग देना शुरू कर दिया।

ऐसा क्‍यों

उन्‍हें क्‍यों पहले से बनी व्‍यवस्‍था को ही फॉलो करना चाहिए जबकि
- उनके पास नैसर्गिक ताकत है
- पूर्व के किसी भी आम इंसान की तुलना में अधिक बुद्धि है
- पहले से अर्जित किसी भी ज्ञान से अधिक ज्ञान है
- किसी भी सत्ता के प्रति जवाबदेही नहीं है
- पृथ्‍वी के भीतर या ब्रह्माण्‍ड में कहीं उन्‍हें रुकना नहीं है
- ताकत और बुद्धि के अलावा कम जरूरतें उन्‍हें स्‍वतंत्र प्रभुसत्ता देती हैं
- वे खुद बेहतरीन न्‍याय कर सकते हैं
- उन्‍हें सलाखों में कैद नहीं किया जा सकता
- राजनीति से वे परे हैं
- सामाजिक बंधन उन्‍हें बांध नहीं सकते
-  वे पलक झपकते ही कहीं भी पहुंच सकते हैं
और भी ऐसी हजारों विशेषताएं जो किसी आम मानव की तुलना में उन्‍हें श्रेष्‍ठ बनाती है। इसके बावजूद वे उसी व्‍यवस्‍था का हिस्‍सा बनते हैं जो व्‍यवस्‍था पहले से बनी हुई है। वे उसमें बदलाव नहीं लाते, बल्कि व्‍यवस्‍था को तोड़ने वाले लोगों को दण्डित करते हैं। पिछले दिनों हैनकॉक आया और उसके बारे में पढ़ा तो लगा कि हां यह है असली सुपरमैन, लेकिन फिल्‍म के अंत तक वह भी आम सुपरमैन बन गया। अच्‍छे कपड़े पहन लिए और समाज की सेवा करने लगा। तो क्‍या सुपरमैन केवल समाज की सेवा के लिए अतिरिक्‍त शक्तियां लेकर आते हैं।

वास्‍तव में सुपरमैन कर क्‍या रहे हैं-
- कानून तोड़ने वालों को दण्‍ड देते हैं
- व्‍यवस्‍था को बनाए रखने में सहयोग देते हैं
- निर्बल लोगों को समस्‍याओं से बाहर निकालते हैं
- अंडर कवर बने रहकर सामान्‍य जिंदगी जीते हैं
- कानून का पालन करते हैं
- राजनीतिज्ञों, पुलिस, प्रशासन, समाज के ठेकेदारों, बॉस, परिवार जैसी इकाइयों का सम्‍मान करते हैं
- सुंदर बने रहते हैं और सुंदर और सभ्‍य लोगों का सम्‍मान करते हैं
- लोगों की केवल उतनी मदद करते हैं कि वे फिर से खड़े होकर पूर्व स्‍थापित व्‍यवस्‍था के लिए काम कर सकें
- बुरे लोगों को पकड़ते हैं और उन्‍हें पुलिस के हवाले कर देते हैं
- पुल को गिरने से बचाते हैं, रेल को ट्रेक पर बनाए रखते हैं, ट्रॉली को नदी में गिरने से रोकते हैं
ये सभी काम तो पहले से स्‍थापित व्‍यवस्‍था के लोग कर ही रहे हैं। सुपरमैनों के इन कामों को देखकर तो लगता है कि लोगों का व्‍यवस्‍था से जुड़े कार्मिकों पर से विश्‍वास उठ गया है। अब आम जनता को ऐसे लोग चाहिए तो तन-मन और धन से उनकी सेवा तो करें, लेकिन अंडर कवर रहकर कुछ भी बदले में नहीं मांगे। ऐसा क्‍यों, भगवान का अवतार अधर्म को खत्‍म कर धर्म को फिर से स्‍थापित करने के लिए ही होता है। इंसान की बनाई व्‍यवस्‍था ढहने लगती है तो वह उसे सुधारने के बजाय भगवान को याद करता है। उन्‍हें कहता है आओ और मुझे फिर से अपने कंफर्ट जोन में लौटा दो। जब से भगवान ने आना बंद किया है इंसान ने सुपरमैन को बुलाना शुरू कर दिया है।

तो सुपरमैन ऐसा क्‍यों नहीं करते कि-
- वे अपनी शक्तियों के इस्‍तेमाल का राज्‍य और सरकार से कर वसूलना शुरू कर दें
- अंडर कवर रहने के बजाय एक नई व्‍यवस्‍था बनाएं जो राज्‍य के सामानान्‍तर चले
- वे खुद अपने स्‍तर पर न्‍याय करें। जो लोग सही है उन्‍हें प्रशय दें और जो गलत हैं उन्‍हें अपने स्‍तर पर ही दण्डित कर दें
- वे ऐसे विचार लेकर आएं जो हर जगह क्रांति कर दे
- वे ऐसे लोग तैयार करें जो उनकी तरह ही अपनी सामान्‍तर सत्ता चलाएं
- वे लोगों को सुपरमैन बनने के लिए प्रशिक्षित करें
वे खूब बच्‍चे पैदा करें और पूरी पृथ्‍वी को सुपरमैन की नई प्रजाति से भर दें, ताकि अक्षम और नाकारा हो चुके इंसान पूरी तरह खत्‍म हो जाएं जैसा कि होमो सैपियंस ने नियंडरथल मानव के साथ किया होगा। यह नई सुपरमैन प्रजाति ही पृथ्‍वी पर राज करे और किसी दूसरे को विकसित ही नहीं होने दे। बिल्‍कुल वैसे जैसे बरगद अपने नीचे किसी दूसरे पौधे को विकसित नहीं होने देता।

पर ऐसा नहीं होगा- क्‍योंकि आखिर सुपरमैन भी तो इंसान ने ही बनाए हैं। और जब इंसान ने अपने लिए सुपरमैन बनाए हैं तो वे इंसान की ही सेवा करेंगे, न कि उन्‍हें मारकर अपनी दुनिया बनाएंगे।

तो कैसा होगा सुपर ब्‍लॉगर
- पहले से स्‍थापित ब्‍लॉगरों को फॉलो करने वाला
- पहेलिया लिखने के दौर में पहेलिया लिखने वाला
- भड़ास निकालने वाला
- पुरानी डायरी से निकालकर कविता लिखने वाला
- दूसरे के ब्‍लॉग पर केवल अच्‍छे अच्‍छे कमेंट लिखकर उन्‍हें प्रोत्‍साहित करने वाला
- आस-पास के लोगों को प्रेरित कर उनके भी ब्‍लॉग शुरू कराने वाला


या मन की बातें बिंदास होकर लिखने वाला.....:) 

रविवार, 13 जून 2010

प्रेम का शिकारा

मैंने शिकार नहीं शिकारा ही लिखा है। दरअसल पति और पत्‍नी शादी के तुरंत बाद गृह‍स्‍थी के शिकारे पर आ गिरते हैं। कश्‍मीर की वादियों जैसी खूबसूरत लगने वाली दुनिया में घर एक डल झील बन जाता है और पति और पत्‍नी शिकारे में...
LadyinShikara
अब शिकारे में तो एक ही व्‍यक्ति बैठ सकता है तो दूसरे का क्‍या होता है... यही तो सबसे महत्‍वपूर्ण बिंदू है। वास्‍तव में शिकारे में एक ही आदमी होता है। दूसरा तो पानी में उतराता रहता है। कभी पति शिकारे में तो पत्‍नी पानी में और कभी पत्‍नी शिकारे में तो पति पानी में दिखाई देते हैं। कब, कौन, किसे और कैसे पानी में धकेलने में कामयाब होता है यह व्‍यक्तिगत स्किल पर निर्भर करता है। आमतौर पर पुरुषों को ही अधिकतर पानी में देखा गया है, लेकिन कई बार पत्नियां भी पानी में आ गिरती हैं। पर, मूढ़ पुरुषों की तुलना में वे पानी में कम वक्‍त बिताती हैं। यही नहीं जब पत्‍नी शिकारे में होती है तो झील में भ्रमण को दौरान शिकारे को धक्‍का भी पतिदेव से ही लगवाती हैं। आप अगर शादीशुदा हैं तो इस स्थिति से रोजाना ही रूबरू होते होंगे।

दरअसल शिकारे की सवारी के कई नियम हैं। पता नहीं ये शाश्‍वत हैं कि नहीं, लेकिन शादी के बाद से अब तक पिछले पांच सालों में मुझे इनकी इटरनिटी पर कोई संदेह नहीं रहा है। आप भी विश्‍वास कर सकते हैं।
पहला नियम: शिकारे में एक बार में केवल एक ही खिलाड़ी बैठ सकता है, इसमें बैठने का आपके पास ठोस कारण होना चाहिए, वरना आप खुद ब खुद पानी में आ गिरेंगे।
दूसरा नियम: पानी से निकलने के लिए सही समय का इंतजार करें, समय से पहले बाहर निकल आए तो शिकारा भरा हुआ मिलेगा और फिर से पानी में जा गिरेंगे।
तीसरा नियम: एक बार शिकारे पर जमने के बाद पानी में गिरे साथी को शिकारे में पहुंचने के लिए हाथ देने का उपक्रम करें, भले ही आपके हाथ में तेल ही क्‍यों न लगा हो।
चौथा नियम: जितनी बार आप फिसलकर पानी में गिरेंगे आपके शिकारे में लौटने का प्रयास करने की समयावधि भी बढ़ती जाएगी।
पांचवा नियम: एक बार पानी में गिर ही पड़ें तो कुछ देर वहीं बने रहें, बिना वजह खुद को शिकारे में होने का धोखा न दें... आखिर हार मानने का जज्‍बा भी तो होना चाहिए।

नोट: ध्‍यान रखें कि जब आप दोनों ये खेल खेल रहे हों तो किसी और को आपके शिकारे या पानी में होने की स्थिति का पता नहीं चले। इससे केवल जगहंसाई ही हो सकती है। सॉल्‍यूशन नहीं मिलेगा। सो निजी प्रयासों से खेल को चालू रखें और बाहर के लोगों को बाहर रखें। आखिर खेल आपका है और खेल का मजा भी आपका निजी है... :)

सोमवार, 24 मई 2010

उफ़ ये गर्मी

इन दिनों बीकानेर में पारा ४७ डिग्री के पार है और हवा में नमी ५ से ७ प्रतिशत बनी हुई है. 
ऐसे में मटकी का ठंडा पानी अमृत की तरह लगता है.