बुधवार, 4 मार्च 2009
ऐसो बंसी बजाइ रे कान्हा महलां में सुणीजे रे...
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Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.
सोमवार, 23 फ़रवरी 2009
कुछ दिन पहले एक साल हो गया
मुझे सक्रिय रूप से ब्लॉग में लिखते हुए कुछ दिन पहले एक साल हो गया है। मुझे ठीक से याद नहीं कि पहला दिन कौनसा था लेकिन फरवरी 2008 में मैंने लेख लिखने शुरू कर दिए थे। अपनी ब्लॉगर प्रोफाइल देखता हूं तो पता चलता है कि मैं ब्लॉगिंग से जुलाई 2006 से जुड़ा हुआ हूं। लेकिन तब मैंने एकाध पोस्ट लिखी और लम्बे समय तक चुप हो गया। एक तो पत्रकारिता में बुरी तरह उलझा हुआ था दूसरे कुछ ही दिन में मेरा पुत्र कान्हा पैदा हो गया था। सो जिन्दगी ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि अब तक रोलर कोस्टर राइड कर रहा हूं। हां, छोटे शहर की अपने तरह की राइड है, लेकिन है तेज ही।
मेरा पहला ब्लॉग यही दिमाग की हलचल था। शुरू में पता नहीं था कि क्या लिखें कैसे लिखें। तो मैंने अपने ब्लॉग का नाम दिया था दर्शन और अध्यात्म। फिलासाफी में एमए किया था तो सोचा कि अब तक पढ़ने के बाद चर्चा से तैयार हुआ ज्ञान नेट पर बिखेरा जाए। कुछ ही दिन में गलती पता चल गई और लगा कि कई धुरंधर लोग मुझसे अधिक कूटा-छाना हुआ पेश कर रहे हैं तो फिर रुक गया। इसी दौरान एक और ब्लॉग बना लिया ज्योतिष दर्शन। इसमें मेरे पास ढेर सा मसाला था जिसे मैं नेट पर शेयर कर सकता था। लिखना शुरू किया तो दिशा नहीं थी। शुरू में तो एग्रेगेटर्स से भी नहीं जुड़ा था सो मैं लिखता और लोगों को घर बुलाकर नेट चलाकर दिखाता और लेख पढ़वाता था। बाद में धीरे-धीरे इंटरनेट की युटीलिटीज के बारे में जानकारी एकत्रित की। हर दिन कुछ नया सीखता। टैम्पलेट, एचटीएमएल, यूनीकोड फोंट, हिन्दी टूल जैसी सैकड़ों चीजें सीखी। आज की तारीख में महज गूगल के ही 27 टूल इस्तेमाल कर रहा हूं। इस दौरान ही वर्डप्रेस पर भी गया। वहां ज्योतिषी नाम से एक ब्लॉग बनाया। लेकिन वह अधिक सफल नहीं हुआ। बाद में मैंने इसे बदलकर ज्योतिष प्रवेशिका कर दिया। समय आने पर इसमें बहुत सा मैटर पेल सकूंगा।
ज्योतिष दर्शन और दिमाग की हलचल के बाद नम्बर आया भड़ास का। पत्रकारों के इस ब्लॉग में पहले सदस्यता के लिए मेल नहीं करनी पड़ती थी। यह सबके लिए खुला था। मैंने लॉगइन किया और बन गया सदस्य। शुरू में कुछ लिखना भी शुरू किया लेकिन बाकी लोग इतना भीषण लिख रहे थे कि मेरी हिम्मत ही नहीं होती थी उस स्तर पर जाने और वैसा लिखने की। धुरंधर लोगों के बीच बस पाठक के रूप में शामिल रहा। अब इस ब्लॉग में कुछ सुधार हुआ है सो लिखने का मन करने लगा है। शीघ्र ही कुछ बिंदुओं के साथ भड़ास पर लिखना शुरू करूंगा। हां इस कम्युनिटी ब्लॉग पर लगे मेरे ब्लॉग के लिंक से बहुत से लोग मेरे पास आए। यह जानकारी मुझे दी गूगल एनालिटिक्स ने।
इसके बाद बना मेरे अंचल की कहावतें ब्लॉग। जयपुर के ब्लॉगर राजीव जैन से चैट के दौरान में लगातार लोकोक्तियां इस्तेमाल कर रहा था। उन्होंने मुझे प्रोत्साहित किया और एक कम्युनिटी ब्लॉग बनाने के लिए कहा। बातचीत के दौरान ही मैंने वह ब्लॉग बना दिया। कहावतें नाम से यूआरएल भी मिल गया। पहली ही रात इस ब्लॉग के दो सदस्य बन चुके थे। बाद में और लोग भी जुड़े। आज इसके 19 लेखक हैं। कुछ लेखक तो नियमित रूप से इसमें लिखते हैं तो कुछ ने एक समय विशेष में लिखा। इन दिनों उनकी कहावतें नहीं आ रही। लेकिन इस खूबसूरत ब्लॉग में हर लेखक का योगदान अमूल्य है। एक मॉडरेटर के रूप में मुझे जो लोगों का प्रेम और विश्वास मिला उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
कहावतें ब्लॉग के बाद पिछले दिनों अपनी भाषा में कुछ करने का मन हुआ। हालांकि इससे पहले अविनाश वाचस्पति जी मुझे सलाह दे चुके थे कि अधिक संख्या में ब्लॉग बनाओगे तो उनमें नियमित रूप से लिखने में कठिनाई होगी। पर यहां समस्या यह है कि हर विषय और स्वाद के अनुसार ब्लॉग तो अलग रखना ही पड़ेगा। वरना एक ही ब्लॉग में खिचड़ी बन जाएगी। सो अपनी मातृभाषा के लिए कुछ करने के उद्देश्य से शुरू किया आपणी मायड़ ब्लॉग। इस ब्लॉग में शुरू में मैंने वैद्य सत्यनारायणजी व्यास सा की कविताएं प्रस्तुत की हैं। उनके नायक नायिका भेद को भी ब्लॉग में उतारने के बाद मैं आपणी मायड़ में बीकानेर में मायड़ भाषा को लेकर हो रही गतिविधियों को परोसने का प्रयास करूंगा। आज-कल में न सही दो पांच या दस साल में यह महत्वपूर्ण ऑनलाइन दस्तावेज बन जाएगा।
भड़ास और कहावतें के अलावा नुक्कड़, भारतीय शिक्षा और भारतीय ज्योतिषी कम्युनिटी ब्लॉगों का भी सदस्य हूं। लेकिन इनमें मैंने बहुत नहीं लिखा है। नुक्कड़ में तो अब तक एक भी लेख नहीं लिख पाया हूं। कहते हुए शरमा तो रहा हूं लेकिन एक ब्लॉग मैंने अंग्रेजी में भी बनाया। इसे बनाने के दो कारण थे। पहला तो यह कि कई हिन्दी ब्लॉगर्स ने मुझसे पूछा कि आपको गूगल एडसेंस ने कैसे जोड़ लिया हमें तो वह अनसपोर्टेड लैंग्वेज कहकर छिटका देता है। यही समस्या मेरे साथ भी आई थी। मैंने अपने स्तर पर गूगल एडसेंस से बातचीत की और उन्हें एड देने के लिए मना लिया। बाद में गूगल ने एड तो दिए लेकिन सार्वजनिक सेवा विज्ञापन ही देता रहा। तब मैंने दूसरे ब्लॉगर्स को बताने के लिए और गूगल एडसेंस को चेक करने के लिए अंग्रेजी में 99 ka pher नाम से ब्लॉग बनाया। इसमें मैंने पैसा कमाने के तरीके बताने शुरू किए। हालांकि अब तक मैंने केवल यही बताया है कि एडसेंस से कैसे वार्ता की जाए कि वे एड देने के लिए हिन्दी ब्लॉगर को रजिस्टर कर लें। चार लेख से आगे यह ब्लॉग बढ़ नहीं पाया है। इसके दो कारण हैं। पहला तो यह कि पैसा कमाने के प्रति मेरी बहुत अधिक रूचि नहीं है। एडसेंस से एड लेना प्रतिष्ठा का विषय बना तो ले लिए। दूसरा कारण अंग्रेजी में हाथ तंग होना तो है ही। :)
इस तरह एक साल का समय कुछ ऐसे बीता कि पता ही नहीं चला कि कब एक साल हो गया। बस लिखता गया और बढ़ता गया। मुझे लगता है कि आज जो लेख लिखा है यह मुझे पांच साल बाद लिखना चाहिए। उम्मीद करता हूं कि फरवरी 2013 में एक बार फिर मैं ऐसा लेख लिखूं जिसमें बहुत सारी यादें हों। वैसे यादें तो अब तक की भी हैं। मसलन स्त्री की सुंदरता के विषय में लिखने के बाद महिला ब्लॉगरों से झाड़ खाना, टिप्पणी पर लिखकर समीर भाई को छेड़ देना, भड़ास पर मन नहीं लगने की बात कहकर हलचल पैदा करना। लेकिन कहीं भी मेरा मंतव्य ऐसा नहीं था कि हलचल पैदा करूं। हां, वे सभी हलचलें मेरे दिमाग में जरूर थीं।
अब तक सभी ब्लॉगरों से सहयोग, प्यार, आशीर्वाद और विचार मिले हैं। आशा करता हूं कि आगे भी मिलते रहेंगे...
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Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.
शनिवार, 21 फ़रवरी 2009
कुरजां के साथ एक दिन
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Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.
शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2009
इन्हें फेल कर दो
समीरजी की किसी ने देखा तो नहीं पढ़ा तो मुझे भी अपना एक किस्सा याद आ गया। तब मैं सातवीं कक्षा में था। दिनभर खेलना कूदना और धमाचौकड़ी करना। इसके लिए हम पर्याप्त दोस्त थे। एक मिनट भी शांति नहीं मिलती थी। स्कूल से बारह बजे लौटने के बाद रात दस बजे एक एक मिनट का कार्यक्रम पूर्वतय रहता। सो पढ़ने का समय ही नहीं मिल पाता था। अनुज आनन्द छठी क्लास में था। दोनों की धमाचौकड़ी से परेशान मम्मी ऑफिस से लौटने के बाद जमकर गालियां निकालती। गला साफ करने के बाद हाथ भी साफ करतीं। सो मानसिक और शारीरिक ताकत की कीमत और उसे जल्द से जल्द अतिविकसित करने का ख्याल वहीं से आया।
खैर हमारी धींगामुश्ति को देखते हुए ऐन परीक्षा के दिनों में मम्मी किन्हीं कारणों से पढ़ा नहीं पाई। परीक्षा के बाद उन्हें ध्यान आया कि बच्चों की परीक्षा हो चुकी है। सो उन्होंने अधिकृत घोषणा कर दी कि इस साल आनन्द और नरेन्द्र (मेरा घर का नाम) दोनों फेल होंगे। मिठाईयां बंट गई और शाबासी के न्यौते आने लगे। अब हम क्या सफाई दें। इम्तिहान में मिले पर्चे लेकर हम लगभग सभी गुणीजनों की सेवा में उपस्िथत हुए और पूरा पर्चा हल करके बताया तो हमारी तारीफ भी हुई और सलाह भी मिली कि पहले ही मेहनत करके पाठ याद करते तो परीक्षा में भी ऐसा ही पर्चा हल कर आते। हम कटकर रह जाते। परीक्षा परिणामा आने तक तो खुद हम दोनों को ही यकीन हो गया कि इस बार तो फेल हो गए। किताबें भी नई नहीं दिलाई गई। पिछले साल की किताबें ही जो काम आनी थी।
परिणाम आ गया। घर में सभी लोग इतने आशवस्त थे कि कोई भी स्कूल नहीं गया। दोस्तों को पता था कि सिद्धार्थ हर साल की तरह इस साल भी गिरता पड़ता पास हो जाएगा तो किसी ने रिजल्ट शीट में मेरा नाम ढूंढने की भी कोशिश नहीं की। धमाका आनन्द ने कर दिया। वह क्लास टॉप कर गया। सो उसके मित्र घर आ गए और बता दिया। मम्मी ऑफिस गई थी। हम दोनों ही घर में थे। आनन्द ने सुना तो मेरा पूछा। दोस्तों ने कहा पता नहीं तेरा तो देखा ही नहीं। मैं सन्न। किसी तरह तैयार होकर स्कूल पहुंचा तो मास्टरजी मिल गए। पूछा क्या हुआ पास या फेल। मैंने कहा पता नहीं तो उनकी पेशानी पर भी बल पड़ गया। खैर बाबूजी से पूछा तो पता चला कि पिछले सालों की तरह ही पास हो गया था।
अब शाम तो सभी लोग घर पहुंचे तो हम पहले की तरह नाच गा रहे थे। पिछले कुछ दिन से यह क्रम रुक सा गया था। अब फिर से शुरू हुआ तो मम्मी ने कहा कि इन लड़कों को बिल्कुल शर्म नहीं है। हमने बताया कि पास हो गए हैं तो मम्मी बिगड़ गई। पहले तो विश्वास ही नहीं किया और जब विश्वास दिलाया तो और भी बड़ा धमाका हुआ। वे अगले दिन सुबह हमारी स्कूल के प्रिंसीपल शास्त्री जी (उन्होंने संस्कृत में शास्त्री की उपाधि प्राप्त की थी सो उनका नाम ही शास्त्रीजी पड़ गया था, एक बात और वे औरतों से बात नहीं करते थे, महिला सामने आने पर गर्दन नीचे किए रखते और धीरे धीरे बोलते थे) के पास पहुंच गई। उन्होंने उनकी मेज पर धौल मारकर बोलीं इन बच्चों को आपने कैसे पास कर दिया। इन दोनों ने पूरे साल पढ़ाई नहीं की। अगर इसी तरह आप पास करते रहे तो इनकी नींव कमजोर रह जाएगी। कैसे भी हो आप इन दोनों को फेल कर दो। अब हैरान होने के बारी शास्त्रीजी की थी। उन्होंने कहा ठीक है कर दूंगा और किसी तरह मम्मी को टाला और शाम तक आ गए मेरे पड़नानाजी के पास जो उनके गुरू रहे थे। मेरे पड़नाना बहुत हंसे। बोले विश्वास तो मुझे भी नहीं हो रहा है। उन्होंने शास्त्रीजी को समझाकर भेजा। अगले दिन पूरी स्कूल और सभी रिश्तेदारों को यह बात मालूम हो चुकी थी। यह कई दिन तक हंसी मजाक का केन्द्र बनी रही। और हमारी हालत... वह तो किसी ने भी नहीं देखी।
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गुरुवार, 19 फ़रवरी 2009
कोने रोकने का खेल
जब हम लोग छोटे थे तो एक खेल खेलते थे। इस खेल में पाटे पर कुछ बच्चे चढ़ जाते। आमतौर पर इसे पांच लोग खेल सकते हैं। जैसा कि आप समझ सकते हैं कि चौकोर पाटे में चार खाने हो सकते हैं। एक बच्चा एक कोने में और बाकी तीन दूसरे तीन खानों में। पांचवा बच्चा बीच में खड़ा होता। एक बच्चा अधिक देर तक अपने स्थान पर खड़ा नहीं रह सकता था। यानि उसे कोना छोड़ना होता था और दूसरे कोने वाले से एक्सचेंज करना होता। इसी प्रयास के दौरान बीच में खड़ा बच्चा खाली हो रहे कोने में धंसकने की कोशिश करता। अगर कोना पकड़ने में सफल होता तो जो पिछड़ता वह बीच में आ जाता। इसे खुणा रोकणी यानि कोना रोकने का खेल कहते हैं।
इस खेल के बाद एक दूसरे खेल में जुड़ा वह था बॉस्केटबॉल। मैं तीन कोर्ट पर प्रेक्टिस किया करता था। कॉलेज में, रेलवे ग्राउंड में और पुष्करणा स्टेडियम में। मुझे तीनों जगह आसानी से प्रवेश मिल जाता था। इसके दो कारण थे। पहला कि मैं किसी ग्रुप का सदस्य नहीं था। तो जो भी टीम बनती मुझे आसानी से प्रवेश मिल जाता। खेलने वालों को तो बस खिलाड़ी चाहिए। यहां खुणा रोकणी से दूसरी बार साक्षात्कार हुआ। हर कोर्ट पर अपने कोने दबाए हुए लोग मिलते। कुछ किनारों पर होते तो कुछ बीच में खड़े भी मिलते। मैं खुद ही बीच में ही रहता। क्योंकि तीन कोर्ट में प्रवेश होने के कारण कभी किसी कोने से मोह नहीं रहा। खेल के आखिरी दिनों में मैंने छोटे बच्चों को सिखाना शुरू किया और पूर्व में सिखा रहे प्रशिक्षकों की दमनकारी नीतियों से हटकर हर किसी को कोर्ट पर खुला निमंत्रण दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि पहली बार पुष्करणा स्टेडियम की टीम जिला स्तरीय प्रतियोगिता में तीसरे चक्र तक पहुंची। आमतौर पर उसे प्रवेश ही नहीं मिलता था। पहली सफलता के बाद कई लोगों के कोने असुरक्षित हो गए। मेरा विरोध शुरू हो गया। मेरा ध्यान पहली बार कोना पकड़कर खड़े लोगों पर गया। मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन देर हो चुकी थी। मैं चाहे-अनचाहे भीषण वार कर चुका था। एक बार फिर मैंने पूरा पाटा ही छोड़ दिया। यानि ग्राउंड जाना बंद कर दिया। लेकिन एक सोच दिमाग में घर कर गई कि जो लोग जिन किनारों पर खड़े होते हैं उन्हें उन किनारों से प्यार हो जाता है। जब कोई बाहर से आता है और उन किनारों में कुछ बदलाव करने की कोशिश करता है तो किनारा पकड़कर बैठे लोगों को बहुत तकलीफ होती है।
अब ऐसा ही कुछ खेल ब्लॉगिंग में भी दिखाई दे रहा है...
...इति
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Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.