रविवार, 25 जनवरी 2009
डर का ठोस कारण
भारतीय फिल्म परम्परा में प्रेम और बदला प्रमुख हैं। राज द मिस्ट्री कन्टीन्यूज में पहले तो यही कंफ्यूजन है कि हीरो कौन है। अपने दिमाग के अनुसार तो वही हीरो होता है जिसके पास हीरोइन होती है (नशा पैदा करने वाली नहीं नशे में रहने वाली) और जो हीरोइन और हीरो के मिलने का विरोध करता है वह विलेन होता है। इस मूवी में तो सब गढमढ है। हीरोइन फिल्म के शुरू में किसी और के सामने नाचती है और इंटरवेल तक किसी और के साथ गंभीर हो जाती है और अंत में अकेली बैठी नजर आती है।
अब प्रेम का पक्ष तो खत्म बचा बदला। हीरो अपने बाप का बदला नहीं लेता बल्कि जिस लक्ष्य को लेकर उसका बाप मरा है उस लक्ष्य को पूरा करने की बस गरज होती है। अंत में हीरो के बाप को खुद ही विलेन को मारना पड़ता है।
जो भी हो फिल्म में पर्यावरण के प्रति दिखाई गई चिंता और डर पैदा होने का ठोस कारण इसे विशिष्ट बना देते हैं। कहानी इतनी दमदार है कि अन्य पक्षों की कमजोरी का पता ही नहीं चलता। दर्शक दम साधे कहानी के साथ आगे बढता रहता है। आखिर में जब सबकुछ खुलकर सामने आ जाता है तो तीन घण्टे के दौरान पैदा हुआ स्ट्रेस भी खत्म हो जाता है।
अंत में मेरी सलाह यही है कि फिल्म देखनी चाहिए। और हां फिल्म में जग्गू दादा का अहम रोल है।
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Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.
शनिवार, 24 जनवरी 2009
भारतीय सुंदरियों और ओबामा की विजय
मुझे यही स्थिति ओबामा की विजय की लगती है। रेड इंडियन्स को खदेड़ने के बाद क्या आज तक एक भी ऐसा काला आदमी नहीं आया जो इतना बुद्धिमान हो कि वह अमरीकी शासन का नेतृत्व कर सके। नहीं मुझे ऐसा नहीं लगता। आज तक ओबामा से कहीं अधिक बुद्धिमान और श्रेष्ठ काले लोगों ने अमेरिका के लिए बहुत कुछ किया होगा और इस देश को आगे बढ़ाने के प्रयासों में कहीं कसर नहीं रखी होगी। अब ऐसा क्या हो गया जो ओबामा को शीर्ष पर बिठाना पड़ गया। क्या तीसरी दुनिया के देशों से संवाद का यही एक रास्ता बचा था, क्या मंदी से टूटते अमरीका को किसी काले की जरूरत थी, क्या आम आदमी की राष्ट्रभक्ति पाने के लिए काले को लाया गया है, यह काला कितने प्रतिशत काला है, किन कालों का नेतृत्व करता है। ये सब बातें आपस में गढ़मढ़ होती है और भारतीय होने के नाते चुप रहने की कोशिश करता हूं। क्योंकि आखिर ओबामा ने दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक भारत को चुना और पाकिस्तान को चेतावनी दी। फिर भी क्यों मुझे लगता है वर्णभेद, इस्लामी आतंकवाद और बाजार के दबाव ने ओबामा का भाग्य पहले ही तय कर दिया था। अब इंसान के रूप में खड़ा यह व्यक्ति तो निमित्त मात्र है।
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Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
Astrologer Sidharth Jagannath Joshi is One of the best astrologer having good practice in India. He mastered in traditional Parashar Paddathi, Lal Kitab, Krishnamurti Paddhati and Vastu Shastra. With his accurate horoscope prediction and effective remedies, he got attention from Indians who are spread all over the globe. His premier customer is from USA, Australia, England, Europe, Middle East, China as well as all over India.
सोमवार, 5 जनवरी 2009
सरजमीने हिन्द की औरतों...
आज मैं कह सकता हूं, सरजमीने हिंद की औरतों, तुम्हें सलाम।
ऐसा क्यों । इसका एक मोटा कारण है।
रविवार को मैं जयपुर में था। मौका था राजस्थान पत्रिका के पत्रकारिता पुरस्कारों का। बैस्ट कवरेज कैटेगरी में मेरी टीम को राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा पुरस्कार मिला था। पुरस्कार लेने के बाद हमें अतिरिक्त पुरस्कार के रूप में मिला स्वामीनाथन गुरूमूर्ति का भाषण। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय इकॉनोमी पर स्वामीनाथन के भाषण ने जैसे हमारी (मेरी) आंखें खोल दी।
उन्होंने फैमिली सिस्टम के आधार पर अमरीकी उपभोक्तावाद और बचत के प्रारूप को विस्तार से बताया। आंकड़ों के साथ सिद्ध किया कि अमरीका का इकॉनोमिक डाउनफॉल 80 के दशक में ही शुरू हो चुका था। इसके बाद का काल तो ऐसा था कि अमरीकी लोगों के लिए खर्च करने के लिए जेब भरी होने की जरूरत ही नहीं थी। यानि उधार लो और खर्च कर दो। अब अमरीकी लोगों ने बाजार से पैसा लिया और घूमने फिरने जैसे उपभोग में उसे खर्च कर दिया। चूंकि उनका पैसा और पैसा पैदा नहीं कर रहा था इसलिए रीपेमेंट की स्थितियां बाकी नहीं बची। ऐसे में अमरीकी उपभोक्तावाद पूरी तरह उधार लो और खर्च कर दो पर आ गया। अमरीका को सुपर पावर मानने वाले देश उसे ही ऋण देकर पैसे वाला बना रहे थे। आने वाले पैसे का उपभोग अमरीकी करते रहे। एक दिन बिना बचत वाला यह गुब्बारा फूट गया।
कुल मिलाकर समझा जाए तो किसी भी देश की अर्थव्यवस्था आम आदमी की बचत पर निर्भर करती है। और इसी आम आदमी द्वारा खर्च को बढ़ावा दिए जाने पर अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। जिन देशों को अधिक उपभोक्ताओं की जरूरत थी उन्होंने टारगेटेड देश की औरतों को इस प्रकार शिक्षित किया कि वे औरतें घोंसला संभालने वाली चिडि़या की बजाय आदमी का ही दूसरा रूप बन गई और जमकर खरीदारी और निवेश करने लगीं। ऐसे देश तेजी से उपभोक्ता वादी संस्कृति के शिकार हुए। इसके विपरीत जापान में न तो पुरुषों में ना ही स्त्रियों में बचत को निकालकर निवेश या खर्च की प्रवृत्ति है। इस कारण बाजार को गति देने के प्रयास के मद्देनजर जब जापान में बचत पर ब्याज को कम किया गया उसके बावजूद वहां बचत की प्रवृत्ति में कोई बदलाव नहीं हुआ।
अब बात करते हैं भारत की
भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े दो दशक हो रहे हैं। इस दौरान ब्याज की दरों में कमी, शेयर बाजार की तेजी, निवेश के आसान रास्ते और खर्च प्रोत्सातहित करने के लिए अनगिनत स्कीमें लोगों के सामने पेश की गई। इतना सबकुछ होने के बाद जहां भारतीय पुरुष आम पुरुषों की तरह खर्च और निवेश पर ध्यान देने लगे, वहीं भारतीय स्त्रियां अब भी जरूरत की चीजों में ही खर्च कर रही हैं। यानि एक स्त्री जब कोई चीज खरीदती है तो उसका मूल कारण यही होता है कि क्या इस उत्पाद की अभी घर में जरूरत है। इस वजह से जहां कुल जीडीपी का महज दो प्रतिशत शेयर बाजार में है वहीं बचत का प्रतिशत आज भी बहुत ऊँचा बना हुआ है। यह भारतीय स्त्रियों के कारण ही हो सका। धन्य है मेरे देश की स्त्रियां जिनके कारण वैश्विक मंदी के बावजूद आम भारतीय परिवार मंदी की मार से बचा हुआ है। यानि दूसरे शब्दों में कहें तो बिना शोर शराबे और बिना क्रांति का गीत गाए पारम्परिक भारतीय औरत ने बिना पुरुषों को गाली निकाले देश को बचा लिया। सही कहूं तो वे अपने योगदान से अंजान अब भी समाज और अर्थव्यंवस्था की धुरी बनी हुई हैं।
इस लेख में स्वामीनाथन गुरूमूर्ति से सुने गए शब्द और कुछ मेरे विचारों का घालेमल हो गया है। उम्मीद है लोग पसंद करेंगे।
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Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
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रविवार, 21 दिसंबर 2008
मेरा वाला नीला
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Famous Astrologer Sidharth Jagannath Joshi
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मंगलवार, 16 दिसंबर 2008
ये विजय दिवस क्या ?
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